उदयपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष सेमीनार

ज्योतिष एवं इससे जुड़ी विधाओं पर गहन शोध एवं अध्ययन पर जोर देश के विभिन्न हिस्सों से ज्योतिष से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा ज्योतिष की कई विधाओं पर 40 से अधिक विशिष्ट पत्र वाचन प्रस्तुत

उदयपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष सेमीनार

पूर्व सांसद एवं जाने-माने प्राच्यविद्यामर्मज्ञ श्री भानुकुमार शास्त्री जी की स्मृति में ज्योतिष अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में निम्बार्क महाविद्यालय सभागार में हाल ही आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष सेमीनार यादगार रही।
इसमें ज्योतिष की तमाम विधाओं पर गहन शोध एवं अध्ययन को बढ़ावा देने, गणित एवं फलित में समरूपता लाने के लिस सूक्ष्म तत्वों की पड़ताल करते हुए निष्कर्ष तलाशने तथा ज्योतिषीय कालगणनाओं में खगोलीय परिवर्तनों के प्रभावों को समाहित करने पर जोर दिया गया।
इस राष्ट्रीय सेमीनार में राजस्थान सहित देश के विभिन्न प्रान्तों से 200 से अधिक ज्योतिषियों एवं ज्योतिष विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें ज्योतिष से संबंधित विभिन्न विधाओं एवं प्रक्रियाओं से संबंधित विषयों पर 40 विद्वान एवं विदुषी ज्योतिर्विदों ने पॉवर पॉइन्ट प्रजेन्टेशन के जरिये पत्रवाचन प्रस्तुत किए और अपनी-अपनी वार्ताओं के जरिये सटीक एवं प्रामाणिक जानकारी दी। इन विषयों पर चर्चा सत्र भी हुए, जिनमें निष्णात ज्योतिषियों ने ज्योतिष की विभिन्न विधाओं में कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रकट करते हुए संभागियों एवं शंकाओं व प्रश्नों का समाधान किया। 
वैदिक ऋचाओं से स्वस्ति गान एवं दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ -
राष्ट्रीय ज्योतिष सेमीनार का शुभारंभ निम्बार्क महाविद्यालय के सभागार में वैदिक ऋचाओं से स्वस्ति मंगलगान, सरस्वती पूजन व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में अतिथियों के रूप में पूर्व कुलपति डॉ. कैलाश सोडानी, विशिष्ट अतिथि महन्त रासबिहारी शरण, विधायक धर्मनारायण जोशी, पूर्व विधायक रणधीरसिंह भीण्डर, वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रश्मि बोहरा व संस्थान अध्यक्ष हरीश्चन्द्र शर्मा ने दीप प्रज्वलन व स्व. भानुकुमार के चित्र पर माल्र्यापण कर किया। 
पं. अखिलेश शर्मा ने संस्थान का परिचय व गतिविधियों की जानकारी दी। संस्थान के अध्यक्ष हरीश्चन्द्र शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए  सेमीनार आयोजन तथा ज्योतिष के विविध आयामों व ज्योतिषीय अनुसंधान कार्यों की चर्चा की।
कोटा खुला विश्वविद्यालय की क्षेत्रीय निदेशक डा. रश्मि बोहरा ने कहा कि ज्योतिष बीज से लेकर वृक्ष बनने, सूर्य, तारों , ग्रह-नक्षत्रों से लेकर गणित व दर्शन से जुड़ा है, ज्योतिषीय कालगणना व फलित में अध्ययन अनुसंधान महत्वपूर्ण है और इस दिशा में निरन्तर शोध अध्ययन की जरूरत है। पूर्व विधायक रणधीरसिंह भीण्डर ने ज्योतिष जगत में वर्तमान समयानुकूल सटीक अनुसंधान पर बल दिया।
इन्होंने दी वार्ताएं, हुई सार्थक परिचर्चाएं -
विभिन्न सत्रों में हरिश्चन्द्र शर्मा ने ग्रहों के प्रभाव की खगोलीय समझ , गोविंद मौर्य ने ज्योतिष एवं भौतिकी, साधना मेनारिया ने ज्योतिष में ग्रहफल , न्यायाधीश हिमांशु नागौरी ने विवाह एवं न्याय प्रणाली का ज्योतिषीय संदर्भ, भारती दशोरा ने ज्योतिष एवं मनोविज्ञान व डा. सुरेश जोशी ने कुंडली मिलान की वैज्ञानिकता विषयक व्याख्या करते हुए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
सेमीनार में ज्योतिर्विदों पं. हरिशचन्द्र शर्मा ने जुड़वा संतानों, डॉ. अखिलेश शर्मा ने कालचक्र गणना, डॉ. भगवतीशंकर व्यास ने षोड़श संस्कार, डॉ. अलकनंदा शर्मा ने वर्षफल का महत्त्व, आरपी शर्मा ने वर्षफल मार्गदर्शन और डॉ. कल्पना शर्मा ने वास्तु विज्ञान विषय पर पत्रवाचन प्रस्तुत किए। 
स्वरविज्ञानी डॉ. दीपक आचार्य ने जीवन और जगत के परिवर्तनों को समझने में स्वर ज्योतिष, स्वास्थ्य संरक्षण एवं आशातीत सफलता पाने में स्वर विज्ञान के महत्व एवं प्रभावों के बारे में विस्तार से वार्ता प्रस्तुत की।
सेमीनार में अहमदाबाद की स्मिता सुथार ने हस्तरेखा एवं हस्ताक्षर विज्ञान प्रदर्शन, मंगल दोष निवारण, जितेंद्र त्रिवेदी ने आराध्य देव, विष्णु भाई वैष्णव ने केपी पद्धति, पं. जगदीश शास्त्री ने वेद विद्या, सुनील त्रिपाठी, रीना जोशी, विष्णु प्रकाश, प्रकाश प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद, सुरेश जोशी, प्रवीणा माथुर, सुमित्रा साहू आदि ने ज्योतिष की विभिन्न विधाओं से परिचय करवाया एवं पत्र वाचन प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का संचालन ज्योतिर्विद डॉ. भगवतीशंकर व्यास एवं अखिलेश शर्मा ने किया।
संभागियों को ज्योतिष रत्न सम्मान -
सेमीनार के समापन समारोह में अतिथियों के रूप में उपस्थित सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बीएल चौधरी एवं कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मनोहर कालरा ने ज्योतिर्विदों को उपरणा, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। 
सेमीनार के आयोजक ज्योतिष अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष जाने-माने खगोलशास्त्री एवं ज्योतिर्विद पं. हरीशचन्द्र शर्मा ने ज्योतिष सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि ज्योतिष के अध्ययन-अनुसंधान एवं गहन शोध के लिए संस्थान द्वारा व्यापक स्तर पर गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। 
पं. शर्मा ने कहा कि ज्ञान के संरक्षण के लिए पुस्तकों का प्रकाशन आवश्यक है लेकिन ज्ञान वृद्धि के लिए तपस्या अनुसंधान एक जरूरी हिस्सा है। वक्ताओं ने कहा कि ज्योतिष मानव जीवन से जुड़ा विषय है और इसके अध्ययन अनुसंधान एवं तकनीक के माध्यम से इसे आम जन तक पहुंचाने का सतत प्रयास किया जाना चाहिए।
प्रो. चौधरी ने कहा कि मानव जीवन में ज्योतिष एवं कर्मकांड का अति महत्त्व है जो कि हमारी सनातन परंपरा का अहम् हिस्सा है, ज्योतिष विज्ञान की विभिन्न विधाओं का संरक्षण किया जाना चाहिए, साथ ही इसे सरलता के साथ आमजन तक भी पहुंचाना चाहिए ताकि इस विधा के दिव्य ज्ञान का लाभ आम आदमी तक भी पहुँच सके।
डॉ. भगवतीशंकर व्यास एवं पं. जगदीश श्रीमाली ने वैदिक मंगलाचरण किया। अतिथियों का स्वागत संस्थान के पं. पदम कुमार शर्मा, पं. अखिलेश शर्मा, राजेन्द्रप्रसाद जैन एवं डॉ. सुरेश चंद्र जोशी ने किया। आभार ज्ञापन पं. पदम कुमार शर्मा ने किया।
सेमीनार में महापौर गोविंदसिंह टांक, यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली, विप्र फाऊंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष के. के. शर्मा, पूर्व र्पाषद दिनेश माली व विजय प्रकाश विप्लवी भी उपस्थित रहे। अपनी तरह का यह ऎसा पहला आयोजन रहा जिसमें ज्योतिष से जुड़े तमाम विषयों पर गहन चर्चा के बाद कई निष्कर्ष तलाशे गए। संस्थान की ओर से जानकारी दी गई कि सेमीनार में प्रस्तुत पत्रवाचनों, वार्ताओं एवं विचारों के संकलन के रूप में शीघ्र ही ग्रंथ प्रकाशित किया जाएगा और इस प्रकार के आयोजन हर वर्ष किए जाएंगे।