नगर में जगह-जगह हुआ शीतला पूजन

नगर में जगह-जगह हुआ शीतला पूजन

जिले में जगह जगह हुआ शीतला पूजन नगर भर में महिलाओं ने की पूजा अर्चना । महिलाओं ने शीतला पूजन के दौरान शीतला माता पूजन से जुड़ी कथाओं का भी वर्णन किया । हिंदू धर्म में हर त्योहार का अपना विशेष महत्व है शीतला अष्टमी को बसौड़ा के नाम से भी जानते हैं. आम तौर पर शीतला अष्टमी होली के 8 वें दिन मनाई जाती है. इस दिन शीतला माता को मीठे चावलों का भोग लगाया जाता है. ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं. इस दिन शीतला माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस दिन पूजा और व्रत आदि करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और बीमारियों से मुक्ति मिलती है बसोड़ा के दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और उनको बासी पकवानों का भोग लगाया जाता है.

बासी भोजन के भोग लगाने और खाने के पीछे मां शीतला की ये है महिमा :-

शीतला माता को शीतलता प्रदान करने वाली माता कहा गया है. इसलिए उनको समर्पित अष्टमी तिथि को उन्हें जो कुछ भी समर्पित किया जाता है, वो पूरी तरह शीतल रहे, इसलिए उसे रात में ही बनाकर रख लिया जाता है. माता के भक्त भी प्रसाद स्वरूप ठंडा भोजन ही अष्टमी के दिन ग्रहण करते हैं. इस दिन घरों में चूल्हा जलाना भी वर्जित होता है. वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो शीतला अष्टमी के बाद ग्रीष्म काल अपना जोर लगाना शुरू कर देता है. इस दिन को शीत काल के आखिरी दिन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन से भोजन खराब होना शुरू हो जाता है. शीतला अष्टमी के दिन मातारानी को सप्तमी को बने बासे भोजन का भोग लगाकर लोगों को ये संदेश दिया जाता है कि आज के बाद पूरे ग्रीष्म काल में अब ताजे भोजन को ही ग्रहण करना है.