श्रद्धालुओं का उमड़ा जन सैलाब, पांच हजार भक्तों ने ग्रहण की महाप्रसादी

डिडवानिया परिवार ने गोहितार्थ भरा 3 लाख 51 हजार रुपये का मायरा, विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय, नागौर में डिडवानिया परिवार नवलगढ़ झूंझुनू वालो द्वारा अपने पूर्वजों की पुण्य स्मृति में आयोजित महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी महाराज के सानिध्य में गोहितार्थ विशाल श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन।

श्रद्धालुओं का उमड़ा जन सैलाब, पांच हजार भक्तों ने ग्रहण की महाप्रसादी

नागौर। विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय, नागौर में डिडवानिया परिवार नवलगढ़ झूंझुनू वालो द्वारा अपने पूर्वजों की पुण्य स्मृति में आयोजित महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी महाराज के सानिध्य में गोहितार्थ विशाल श्रीमद् भागवत कथा में देवी ममता ने कृष्ण सुदामाजी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सुदामाजी भगवान कृष्ण के द्वार पहुंच कर द्वारपालों को श्री कृष्ण को अपना सखा बताते हुए संदेश पहुंचाने का निवेदन किया तो द्वारपालों ने मैले कुचले वस्त्रों में सुदामाजी को देखकर उपहास उड़ाना शुरू कर दिया। सुदामाजी के बहुत ही मार्मिक निवेदन पर भगवान कृष्ण के पास संदेश पहुंचाया गया। जैसे ही भगवान कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा को अपने आंगन में आने की सूचना पायी तो अपने तन मन की सुधि भूलकर भगवान नंगे पैर पागलों की तरह सुदामाजी से मिलने दौड़ने लगे और सुदामाजी को गले लगाकर फफक.फफक कर रोने लगे।

द्वारिकाधीश ने मणी जड़ित सिंहासन पर सुदामाजी को विराजमान कराकर चरण सेवा करना शुरू कर दिया और सोलह हजार एक सौ आठ पटरानियों को चरण धोकर आरती करने कहा गया। सभी ने चरण धोना शुरू किया। सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं। पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं भक्त और भगवान का मिलन था। देवीजी ने कहा कि कृष्ण व सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। राजस्थान की प्रसिद्ध झांकी टीम द्वारा ‘कृष्ण सुदामा मिलन’ व ‘कृष्ण भक्तिन मीरा बाई’ की दिव्य सजीव झांकी का प्रस्तुतिकरण दिया गया।

कथा प्रभारी श्रवण सैन ने बताया कि कथा विश्राम दिवस पर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा, जिसके चलते टेंट की व्यवस्था को बढ़ाया गया व एक अतिरिक्त एल.ई.डी की भी व्यवस्था की गई। कथा विश्राम के पश्चात श्रद्धालुओं को महाप्रसादी दी गई जिसमें पांच हजार श्रद्धालुओं को देशी घी का हलवा व चने की सब्जी का प्रसाद परोसा गया। कथा में आने वाले श्रद्धालुओं को चाय, पानी, शरबत की मनुहार भी की गई।
महामण्डलेश्वर ने अपने आध्यात्मिक प्रवचन में बताया कि सेवा भाव सबसे बड़ा होता है, अतः हमें बिना स्वार्थ के सेवा करते रहना चाहिए सेवा का भाव भगवान के द्वार तक जाता है। परसाराम बामणिया को महामण्डलेश्वर ने अपने नवरत्नों में शामिल कर आशीर्वाद दिया।  
सैन ने बताया कि कथा विश्राम दिवस पर कथा आयोजनकर्ता रामगोपाल डिडवानिया द्वारा 3 लाख 51 हजार रुपये का गोहितार्थ मायरा भरा गया। समस्त डिडवानिया परिवार का तिलक, पुष्पमाला व साफा पहनाकर स्वागत सम्मान किया गया। पुखराजसिंह राजपुरोहित 28,501 रुपये, कमला भार्गव ने 21 हजार व किशोर चौयल ने 20 हजार रुपये का गोहितार्थ कथा में मायरा भरा। कथा विश्राम दिवस पर गोदान हेतु झोली फेरायी गयी जिसमें 45 हजार रुपये से अधिक राशि का सहयोग प्राप्त हुआ। इस दौरान प्रसिद्ध भजन कलाकार फुलचंद मून्दड़ा, संगीता बजाज, सुमित्रा व्यास व मनिष नायक ने अलग-अलग शानदान भजनों की प्रस्तुति दी।

शुम्भूदयाल वर्मा, अशोक समदड़िया, नरसीराम चौकीदार, अजोध्यादेवी, राधेश्याम रोहिला, जगदीश अरोड़ा, भायाराम डिडवानिया, ओमप्रकाश देवासी, धापुदेवी, आचुदेवी, श्रवणराम डोगीवाल, सूर्यकांत त्रिपाठी इत्यादि गोभक्तों ने गोहितार्थ सहयोग किया। इन सभी दानदाताओं का व्यास पीठ की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कथा विश्राम पर भागवतजी की महाआरती की गई जिसमें रामगोपाल डिडवानिया, सम्पतदेवी, सीमादेवी, विकास वर्मा, प्रविण, माधोसिंह गहलोत, कथावाचक चन्द्रप्रकाश शास्त्री, गोविंदराम महाराज, आचार्य पवन पाठक इत्यादि उपस्थित रहे।